GST Rules: मोदी सरकार बदल रही है नये साल से कुछ नियम…?

केंद्र सरकार ने जीएसटी नियमों में कुछ बदलाव की है जो कि 1 जनवरी 2022 से हो जाएंगे लागू आपको बता दें नियमों को किया गया है स्ट्रिक्ट इससे आपकी जेब पर भी असर पड़ने वाला है। तो क्या क्या होगा महंगा कपड़े और जूते हो जाएंगे महंगे क्योंकि इन पर जीएसटी की दर 5 % से बढ़कर 12 % हो जाएगी। कपड़े और जूते जिनकी कीमत हजार रुपए से कम या उसके बराबर उन पर 12 % की दर से जीएसटी लागू होगा। अब बता तें है कौन से फैबिक होंगे महगें बुना हुआ समान, सिथेटिक धागे, टेंट के फैबिक और कंबल के फैबिक हो जाएंगे महंगे। साथ ही टेबल पर यूज होने वाले कपड़े और टेबल नैपकिन पर भी 12 % GST लगेगा वही कॉटन प्रोडक्ट पर एक्सेप्शन है इसीलिए इन पर पांच पर्सेंट जीएसटी लगेगा।

GST Rules: मोदी सरकार बदल रही है नये साल से कुछ नियम…?

ऑनलाइन ओला उबर हुई महगी?

अब बात करते हैं ओला उबर की बता दे ओला उबर के जरिए ऑनलाइन बुक की गई ऑटो राइड पर 5 पर्सेंट जीएसटी लगेगा। लेकिन सड़क से पकड़े गए ऑटो रिक्शा पर जीएसटी नहीं लागू होगा बता दें कि कैब की कीमत कम होगी क्योंकि पहले 6 पर्सेंट जीएसटी लगता था जो कि अब घटकर 5 परसेंट हो जाएगा। यानी ऑनलाइन ऑटो रिक्शा बुक करने पर ज्यादा पैसे देने होंगे लेकिन अगर ऑनलाइन कैब बुक करेंगे तो उसकी कीमत में थोड़ी कमी आएगी और आप को राहत मिलेगी।

GST Rules: मोदी सरकार बदल रही है नये साल से कुछ नियम…?

अब आते हैं फूड डिलीवरी एप्स पर आपको बता दें 1 जनवरी 2022 से जोमैटो स्विगी जैसी फूड डिलीवरी एप्स को कस्टमर से लिया गया जीएसटी जमा करना होगा। यह एप्स 1 जनवरी से अपने द्वारा दी जाने वाली रेस्टोरेंट सर्विसेस पर 5 पर्सेंट जीएसटी जमा करना शुरू करेंगी। आपको बता दें इसका सीधा असर तो कस्टमर्स पर नहीं होगा क्योंकि कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा फिलहाल 5 परसेंट एक्स रेस्टोरेंट द्वारा कलेक्ट किया जाता है जिसे 2022 से फूड डिलीवरी बिजनेस में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

GST Rules: मोदी सरकार बदल रही है नये साल से कुछ नियम…?

अब आते हैं बड़े बिजनेसेस पर और उनके रिटर्न्स पर जीएसटी के नए नियमों के मुताबिक 5 करोड़ या उससे ज्यादा सालाना टर्न ओवर होने वाले बिजनेस पर 2 रिटर्न मंथली सबमिट करने होंगे। GSTR -3B सेल्फ -डिक्लेंयर्ड रिटर्न और GSTR -1 सेल्स इनवोईस ऑफ़ मंथली रिटर्न अगर gstr-3b और GSTR -1 में दिखाए गए रिटर्न से सरकार सहमत नहीं है तो सरकारी अधिकारियों को बिना किसी सूचना के जीएसटी वसूली के लिए भेजा जा सकता है।