गाजियाबाद में फर्जी दूतावास का भंडाफोड़ (Ghaziabad fake embassy)
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गाजियाबाद, 23 जुलाई 2025: उत्तर प्रदेश एसटीएफ (STF) ने गाजियाबाद के कविनगर इलाके में चल रहे एक फर्जी दूतावास (Ghaziabad fake embassy) का खुलासा किया है। आरोपी हर्षवर्धन जैन खुद को माइक्रो-नेशंस (काल्पनिक देशों) का राजदूत बताकर लोगों से करोड़ों की ठगी कर रहा था। यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि इस बात की चेतावनी भी है कि किस तरह तकनीक और प्रभावशाली दिखावे के सहारे आम लोगों को धोखा दिया जा सकता है।
कैसे किया गया फर्जी दूतावास का खुलासा? (Ghaziabad fake embassy)
STF को केंद्रीय एजेंसियों से इनपुट मिला था कि गाजियाबाद में एक व्यक्ति खुद को विदेशी देशों का राजदूत बताकर संदिग्ध गतिविधियाँ कर रहा है। इसी आधार पर 22 जुलाई को कविनगर स्थित एक किराए के आलीशान बंगले पर छापा मारा गया। यहां से एक फर्जी “दूतावास” (Ghaziabad fake embassy) संचालित किया जा रहा था।
Ghaziabad fake embassy का कौन हैं आरोपी?
आरोपी का नाम हर्षवर्धन जैन है, जो खुद को निम्न देशों का “राजदूत” बता रहा था:
Westarctica, Saborga, Poulvia, Lodonia
गौर करने वाली बात यह है कि ये सभी देश अमान्यता प्राप्त माइक्रोनेशन हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई कानूनी मान्यता नहीं है।
ठगी का तरीका क्या था?
हर्षवर्धन लोगों को विदेशों में नौकरी और व्यापार का झांसा देकर भारी रकम वसूलता था। वह खुद को एक प्रभावशाली राजनयिक दर्शाने के लिए निम्न हथकंडे अपनाता था:
फर्जी पासपोर्ट और राजनयिक दस्तावेज
कारों पर डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट
केंद्रीय मंत्रियों, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ फोटोशॉप की गई तस्वीरें
विदेश मंत्रालय की फर्जी मुहरें और सीलें

Ghaziabad fake embassy से STF ने क्या बरामद किया?
कार्रवाई के दौरान STF को आरोपी के ठिकाने से बड़ी मात्रा में संदिग्ध सामान मिला:
नकदी- ₹44.7 लाख और विदेशी मुद्रा
वाहन- 4 लग्जरी गाड़ियाँ डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट्स सहित
दस्तावेज- 12 फर्जी पासपोर्ट, 18 डिप्लोमैटिक प्लेट्स, 34 सीलें
डिजिटल सामान- फर्जी पैन कार्ड, प्रेस कार्ड, मंत्रालयों के लेटरहेड
आरोपी का आपराधिक इतिहास
हर्षवर्धन पर 2011 में अवैध सैटेलाइट फोन रखने का केस दर्ज हो चुका है।उसका नाम चर्चित तांत्रिक चंद्रास्वामी और अंतरराष्ट्रीय हथियार डीलर आदनान खगोशी जैसे विवादित लोगों से भी जोड़ा गया है।
अब आगे क्या?
एसटीएफ ने आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है और जांच जारी है कि उसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े थे। इस फर्जीवाड़े का नेटवर्क कितना बड़ा था, यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
गाजियाबाद का यह मामला यह दर्शाता है कि धोखाधड़ी के तरीके अब पहले से कहीं ज़्यादा हाई-टेक और पेशेवर हो गए हैं। आम लोगों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी डिप्लोमैटिक पहचान, वीज़ा या नौकरी के वादे से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच जरूर करनी चाहिए।