Gorakhpur PAC Camp में हंगामे की वजह
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लोकेशन: गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, तारीख: 23 जुलाई 2025 (Gorakhpur PAC Camp) “उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित PAC कैंप से एक चौंका देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ पर प्रशिक्षण ले रहीं लगभग 600 महिला रिक्रूट्स ने जब पानी, बिजली और बाथरूम जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी पर आवाज़ उठाई, तो पूरे कैंप में हड़कंप मच गया। सवाल ये नहीं कि ये महिलाएं सड़क पर क्यों आईं, असली सवाल ये है कि उनको अपनी इज्जत और बुनियादी हक के लिए सड़क पर उतरना क्यों पड़ा?”
Gorakhpur PAC Camp रिक्रूट्स का दर्द – ज़मीनी हकीकत
“हमसे कहा गया था कि हम उत्तर प्रदेश पुलिस की ‘शक्ति’ बनेंगी, पर यहां तो पानी के लिए लड़ना, खुले में नहाना और डर के साथ सोना हमारी ड्यूटी बन गई है।”कई महिला सिपाहियों ने आरोप लगाए कि बाथरूम में कैमरे लगे हो सकते हैं। हालांकि प्रशासन ने इस दावे की जांच कर इसे बेबुनियाद बताया है।
Gorakhpur PAC Camp में प्रशासनिक लापरवाही ?
600 रिक्रूट्स को रखने की कोशिश उस कैंप में की गई जिसकी क्षमता केवल 300 की है।
इसके ऊपर गर्मी, बारिश और बिजली की कटौती ने स्थिति और गंभीर बना दी।
Gorakhpur PAC Camp में हंगामे के बाद प्रशासन की कार्रवाई
PTI (फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर) को तत्काल निलंबित कर दिया गया। IG PAC और ADG स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से ठीक पहले यह मामला सामने आना, सरकार के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर गया।
राजनीतिक बयान:
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा —“भाजपा सिर्फ ‘नारी वंदना’ के नारे देती है, असल में न महिलाओं की गरिमा है, न ही सम्मान।”
सामाजिक सवाल:
क्या हमारे देश की ‘नई शक्ति’ बनने जा रहीं महिलाएं इतनी असुरक्षित और उपेक्षित महसूस करेंगी? क्या बुनियादी सुविधाएं अब भी ‘मांगने’ की चीज़ हैं? क्या ‘नारी सम्मान’ सिर्फ चुनावी वादों तक सीमित रह गया है?“ये कोई मामूली विरोध नहीं था, बल्कि वो चीख थी — एक वर्दीधारी महिला की, जो सिर्फ वर्दी नहीं, इज्ज़त के साथ जीने का अधिकार भी मांग रही थी। सवाल पूछने चाहिए, जवाब भी मिलने चाहिए — ताकि भविष्य में कोई बहन, कोई बेटी, सिस्टम की लापरवाही की वजह से सड़क पर आंसू न बहाए।”
