Special Intensive Revision (SIR) बिहार में लागू
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बिहार से लेकर दिल्ली तक और बिहार विधामसभा से लेकर दिल्ली की संसद तक आखिर Special Intensive Revision (SIR) पर बवाल मचा क्यों है? क्या होता है ‘SIR’? अचानक से ये शब्द इतना ज़रूरी क्यों हो गया सबके लिए? आइए इस पूरी रिपोर्ट में आपको ‘Special Intensive Revision (SIR) की पूरी ABCD बताएंगे।
क्या है Special Intensive Revision (SIR) ?
‘SIR’ यानि Special Intensive Revision एक प्रक्रिया है जो चुनाव आयोग द्वारा चुनावों से पहले करवाई जाती है। ये प्रक्रिया इसलिए करवाई जाती है क्योंकि एक चुनाव से लेकर दूसरे चुनाव तक देश में या राज्यों में जनसंख्या घटी होगी, बढ़ी होगी, नए मतदाता यानि 18 साल के नए वोटर्स जुड़े होगें, कुछ मतदाता ऐसे भी होंगे जिनकी मृत्यु हो गई हाेगी और कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो अवैध तरीके से राज्यों में रह रहे होंगे यानि घुसपैठी, मूलरूप से समय-समय पर चुनाव आयोग अपनी वोटर लिस्ट को अपडेट करने के लिए Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया करवाती है।
ऐसा ज़रूरी नहीं है कि इसे हर चुनाव से पहले करवाया जाए, जब भी चुनाव आयोग को लगता है कि वोटर लिस्ट में अपडेशन की ज़रूरत है तब चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को करवाता है।
Special Intensive Revision (SIR) कैसे होता है?
चुनाव आयोग द्वारा BLO यानि बूथ लेवल ऑफिसर को आयुक्त किया जाता है। BLO घर-घर जाकर
उस घर में कितने लोग हैं, मूल निवासी कहां के हैं, जिस राज्य में वो रह रहे हैं उस राज्य के मूल निवासी हैं या नहीं, सालों से दूसरे राज्य में तो नहीं निवास कर रहे और वहां भी वोट तो नहीं डाल रहे, दस्तावेजों के ज़रिए इन सभी की जानकारी इकट्ठा करता है और वो सारी जानकारी लेकर चुनाव आयोग के देता है।

चुनाव आयोग सारी जानकारी लेकर अपनी पुरानी मतदाता सूची को रिवाइज़ करता है और जो लोग मृत हैं, दूसरे राज्यों से वोट डाल रहे हैं उनका नाम लिस्ट से हटा देता है और 18 साल वाले नए मतदाताओें को लिस्ट में जोड़ देता है। फिलहाल इस प्रक्रिया को बिहार में चुनाव आयोग द्वारा करवाया जा रहा है क्योंकि बिहार में अक्टूबर या नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं।
Special Intensive Revision (SIR) पर बवाल क्यों?
अचानक से अब Special Intensive Revision (SIR) पर बवाल क्यों हो रहा है, बिहार में 2025 से पहले भी ‘SIR’ करवाया गया था जो कि सबसे पहले 2003 और फिर 2005 में हुआ था। बिहार में विपक्ष हो या दिल्ली की संसद में विपक्ष हो सबकी यहीं मांग है कि हम ‘SIR’ नहीं होने देंगे, बिहार विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष ने काले कपड़े पहनकर इसका विरोध जताया तो वहीं दिल्ली संसद के बाहर इंडिया गठबंधन के लोगों ने पोस्टर और नारेबाजी के ज़रिए इसका विरोध किया।
Special Intensive Revision (SIR) पर विपक्ष का क्या आरोप है ?
विपक्ष का कहना है कि 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान जब ये प्रक्रिया नहीं हुई तो अब बिहार विधानसभा चुनावोें के वक्त ये प्रक्रिया क्यों करवाई जा रही है। तो वहीं दूसरी ओर पक्ष का कहना है कि पहले विपक्ष ही चाहता था की ‘SIR’ हो और अब जब हो रहा है तो इन्हें परेशानी हो रही है।

Special Intensive Revision (SIR) पर अब कुछ नेताओं के बयान
विपक्ष के नेताओं की कहना है –
कांग्रेस नेता राहुल गांधी का कहना है – चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर चल रहा है और ये सिर्फ वोट काटने की कोशिश की जा रही है।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव का कहना है – पूरी प्रक्रिया फरजीवाड़े से करवाई जा रही है, BLO खुद फॉर्म भर रहा है, खुद हस्ताक्षर कर रहा है, अंगूठा लगा रहा है और उसे ही अपलोड किया जा रहा है और सिर्फ संख्या पूरी करवाई जा रही है और अब सरकार में बैठे लोग वोटर चुन रहे हैं।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है – बिहार में एक महीने के अंदर 8 करोड़ लोग और नई वोटर लिस्ट बनना बहुच मुश्किल काम है और बीजेपी ये इसलिए करवा रही है क्योंकि उन्हें पता है कि इस बार तेजस्वी, कांग्रेस और उनका गठबंधन इस बार बीजेपी को हराने जा रहा है और उन्हें हार का डर है।
तो वहीं दूसरी ओर पक्ष के नेताओं की कहना है –
जेडीयू के वरिष्ठ के नेता के सी त्यागी का कहना है – 99.8% मतदाता रजिस्टर हो चुके हैं चुनाव आयोग के द्वारा लिहाज़ा विपक्ष को अब सकारात्मक रुख अपना के चुनाव आयोग के साथ सहयोग करना चाहिए। अब विपक्ष अपनी हार की पटकथा लिख रहे हैं और उसमें सरकार का सहयोग चाहते हैं।
एलजेपी नेता चिराग पासवान का कहना है – विपक्ष ने ही कहा था कि वोटर लिस्ट दोबारा बनाई जानी चाहिए, धांधली बंद होनी चाहिए, घुसपैठियों का पता चलना चाहिए और अब चुनाव आयोग आपकी ही बात को मानकर प्रक्रिया करवा रहा है तो आपको प्रॉब्लम हो रहा है, तो चित्त भी आपकी और पट्ट भी आपकी ऐसा तो नहीं हो सकता।
बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल का कहना है – जो भारत का नागरिक होगा, 18 साल का होेगा वो वोटर रहेगा, मैं जिम्मेदारी देता हूं लेकिन विपक्ष बांग्लादेशी, रोहिंग्या, नेपाली, विदेशी अगर वो गैर कानूनी वोटर बने हैं तो उनको बचाने के लिए लड़ाई क्यों लड़ रहा है, वो वोटर नहीं रह सकते। इस देश की सरकार चुनने का अधिकार सिर्फ देश के नागरिकों को है।