𝐔𝐏 𝐄𝐥𝐞𝐜𝐭𝐢𝐨𝐧𝐬 2022: हाई कोर्ट के जज नें कहा चुनावों को टालना ही बेहतर…?

ओमिक्रोन की वजह से दुनिया भर में हालत खराब है अब देश में भी स्थिति खराब होना शुरू हो चुकी है। देश में ओमिक्रोन के मामलों ने रफ्तार पकड़ ली है और 17 राज्यों से करीब 350 से ज्यादा मामले तक रिपोर्ट किए जा चुके है। इसको लेकर अब सामने एक सवाल आ रहा है. यह सवाल आ रहा है कि अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव जिसमें उत्तर प्रदेश के चुनाव है. क्या वो टाले जा सकते हैं। यह सवाल उठा जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग से अपील की कि चुनाव को टाल दिया जाये। दरअसल जस्टिस शेखर कुमार यादव नें एक जमानत याचिका पर सुनवाई करने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग से अपील की कि कैसे भी कैसे करके चुनाव को आगे बढ़ा दिया जाए टाल दिया जाये। दरअसल शेखर कुमार यादव एक जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, इस दौरान उन्होंने कोर्ट में काफी सारी भीड़ देखी। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग से चुनावों को टालने की मांग करी कहा कि उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में जनता को कोरोंना की तीसरी लहर से बचाने के लिए चुनाव आयोग रैलियों पर रोक लगाए क्योंकि जान है तो जहान है।

𝐔𝐏 𝐄𝐥𝐞𝐜𝐭𝐢𝐨𝐧𝐬 2022: हाई कोर्ट के जज नें कहा चुनावों को टालना ही बेहतर…?

जज शेखर कुमार यादव नें कि पीएम मोदी और चुनाव आयोग से अपील…?

जज शेखर कुमार यादव ने पीएम मोदी और चुनाव आयोग से प्रदेश में होने वाली चुनावी रैलियों और जनसभाओं पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाने की अपील की और उन्होंने कहा राजनैतिक पार्टियां अगर अपना प्रचार करना चाहती हैं तो वों टीवी और अखबार के माध्यम से करें दूसरे अलग प्लेटफार्म के जरिए करें। जज शेखर कुमार यादव ने पीएम मोदी फ्री वैक्सीनेशन प्रोग्राम की तारीफ की उन्होंने कहा भारत जैसे बड़े देश में फ्री वैक्सीनेशन प्रोग्राम चलाना एक बहुत बड़ी बात है। और उन्होंने एक अच्छा काम किया है. लेकिन इसके साथ-साथ अब प्रदेश में आगे होने वाले चुनावों को आगे बढ़ाया जाये यह बेहतर कदम होगा इससे जो बड़ी रैलियां है जहा पर बहुत सारे लोग आते है। वह किसी भी तरह से कोरोना के संक्रमण से बच सके। अब इस अपील पर चीफ इलेक्शन कमिश्नर सुशील चंद्रा ने जवाब देते हुए कहा है. कि हम आगे यूपी और दूसरे राज्यों में जाकर देखेंगे और इस पर समीक्षा करेंगे उसके बाद कोई फैसला नहीं की वहां पर चुनाव कराए जाएं या नहीं।