Mehbooba Mufti ने PM Modi को क्यों किया चैलेंज ? | Har Ghar Tiranga Abhiyan |

जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने केंद्र की मोदी सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने पीएम मोदी को चुनौती दे डाली है और कह डाला है कि अगर उनमें हिम्मत है तो वह जम्मू-कश्मीर के हर उस हिस्से में तिरंगा लहरा कर दिखा दे जहां चीन ने अवैध कब्जा किया हुआ है। महबूबा मुफ्ती की ओर से फायरिंग बयान उस वक्त सामने आया है जब आजादी के अमृत महोत्सव के तहत हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत हर घर पर एक तिरंगा लगाने का आह्वान किया गया है। साथ ही इसे लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है वह और बात है कि पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को तिरंगे से जुड़े इस अभियान में भी माहौल बिगड़ने का अंदेशा दिखाई दे रहा है। उन्होंने हर घर तिरंगा अभियान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कश्मीर घाटी में लोगों को तिरंगा फहराने के लिए मजबूर करने से कुछ हासिल नहीं होगा।

महबूबा मुफ्ती नें एक बार फिर BJP कों लिया निशानें पर

महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर की स्थिति से निपटने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के नाकाम प्रयासों के लिए भी बीजेपी को निशाने पर लिया इस दौरान वो केंद्र पर खासी हमलावर दिखाई दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने ना सिर्फ तिरंगे को बल्कि भारत के संविधान को भी बहुत पहले स्वीकार कर लिया था साथ ही उन्होंने कहा कि इस तिरंगे के अलावा भी उनका अपना एक झंडा और एक छोटा संविधान है जिसे असंवैधानिक तरीके से उनसे छीन लिया गया। श्रीनगर के शेरें कश्मीर मैदान में पार्टी के 23वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित रैली को संबोधित करते हुए महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर से जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए लड़ाई जारी रखने की बात दोहराई साथ ही उन्होंने आर्टिकल 370 को निरस्त करने को असंवैधानिक भी करार दिया। महबूबा मुफ्ती नें 370 कों निरस्त करने के बाद से 3 साल में अपनी पहली सार्वजनिक रैली में कहा कि विकास की राह कश्मीर से होकर गुजरती है।

महबूबा मुफ्ती नें अपने बयान में क्या कुछ कहा ?

अपने संबोधन के दौरान पीडीपी सुप्रीमो महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वह मोदी जी से कहना चाहती हैं, कि अगर वह भारत को विश्वगुरु बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले जम्मू कश्मीर में शांति स्थापना करनी चाहिए। श्रीनगर के हालात पर उन्होंने कहा कि भारत को श्रीलंका मुद्दे पर सार्क की बैठक बुलानी चाहिए थी लेकिन केंद्र ने ऐसा नहीं किया उन्होंने कहा कि सार्क में सबसे बड़ी बाधा भारत और पाकिस्तान के संबंध है और जब तक दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध नहीं होंगे कश्मीर को नुकसान होता रहेगा।