जाने क्या है Sun की Fire Valley जहाँ हुआ भीषण विस्फोट?

Fire Valley of sun
Fire Valley of sun

हमारा सूर्य जितना विशाल है, वह अपने गर्भ में उतनी ही ज्यादा रहस्यों को समेटे हुए हैं। यें ना हो तो धरती पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है, लेकिन नहीं अगर अपना पूर्ण वेग दिखा दे तो सब कुछ भस्म भी कर सकता है। दुनिया भर के वैज्ञानिक यें कहते आए हैं, कि सूर्य से धरती की दूरी और तापमान के संतुलन से ही धरती पर जीवन आबाद हो पाया है, लेकिन अब इसी सूर्य पर पिछले कुछ समय से घट रही घटनाओं ने वैज्ञानिकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। Read also- FIR on Pakistan cricket team : Babar Azam समेत पाकिस्तान क़े 21 खिलाडियों पर FIR दर्ज?

हाल ही में कुछ ऐसा ही घटा है, जिससे दुनिया भर के वैज्ञानिक हैरान और परेशान हैं। रविवार को सूर्य पर कुछ ऐसा घटा जिसने वैज्ञानिकों के माथे पर बल डाल दिए। रविवार को सूर्य पर घटी उस घटना को लेकर वैज्ञानिकों ने जानकारी अब साझा की है। उन्होंने बताया सूर्य पर एक जबरदस्त विस्फोट देखा गया और सूर्य क़े जिस हिस्से में यें घटना घटी, उसे आपकी घाटी के नाम से जाना जाता है।

क्या है सूर्य पर ‘आग की घाटी'(Fire Valley) जिसमें हुआ जोरदार धमाका?

हालांकि सूर्य पर हुए बम विस्फोट का धरती पर क्या असर होगा? यें उनके अध्ययन का विषय है। सूर्य हम से खरबों मील की दूरी पर है, इस लिए उस पर होने वाली घटनाओं का असर हमारी धरती के आस-पास के सौरमंडल में कुछ देरी से देखा जाता है लेकिन ये बिल्कुल सत्य है कि सूर्य पर घटने वाली घटनाओं और उससे निकलने वाली तरंगें धरती क़े आस-पास से गुजरती दर्ज की गई है। गौरतलब है कि सूर्य पर फायर वैली (Fire Valley) क्षेत्र में हुए विस्फोट को लेकर वैज्ञानिकों ने बताया है, की अंतरिक्ष के 0 एरिया में प्लाज्मा की बौछारें हो रही है। ज्यादा चिंता वाली बात यह है, कि हमारी धरती भी प्लाज्मा बौछारों क़े इस रेंज में है।

आपको बता दें कि नेशनल ओसियन एंड आत्मस्पहेरिक एडमिनिस्ट्रेशन(NOAA) क़े एक अनुमान के मुताबिक सूर्य पर हुए उस विस्फोट से धरती पर 16 रेडिएशन तूफान आने की संभावना है? अगर ऐसा हुआ तो यह धरती पर रहने वाले जीवो और सामान्य जन-जीवन पर प्रभाव डाल सकता है, इसी बात से दुनिया भर के वैज्ञानिक चिंतित है। क्योंकि धरती पर आने वाला संभावित 16 रेडिएशन तूफान कितना ताकतवर होगा? और उस से कितना नुकसान पहुंचने की संभावना है, इसे लेकर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाना शुरू कर दिया है।