Business Updates: कर्ज के बोझ तले दबे आइडिया – वोडाफोन कंपनी, मुश्किल वक्त में चेयरमैन ने छोड़ा साथ, क्या बंद हो सकती ये कंपनी?

वोडाफोन-आइडिया इन दिनों मुसीबत में है, कंपनी पर भारी भरकम कर्ज है और इसे चुकाने के लिए फंड्स का जुगाड़ नहीं हो पा रहा है। मुसीबत के समय में कंपनी के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला नें भी कंपनी का साथ छोड़ दिया। कुमार मंगलम बिड़ला बुधवार को कंपनी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे चुके है।

वोडाफोन – आईडिया कंपनी 180,000 करोड़ रुपए क़े, कर्ज़ में डूबी है।

बाजार में वोडाफोन आइडिया को लेकर तरह-तरह की अटकनें भी चल रही है। ऐसे में अगर वोडाफोन-आइडिया बंद होती है, सबसे बड़ा नुकसान बैंक और इनके यूजर्स को लगेगा। Vodafone-idea से बैंकों को भारी-भरकम रकम लेनी है, Vodafone-idea क़े डूबने से देश क़े 8 बैंको पर सीधा असर होगा। Vodafone-idea कंपनी पर 180,000 करोड़ रुपए का कर्ज़ है जिसमें (IDFC) बैंक का वोडाफोन कंपनी के पास ₹3,240 करोड़ बकाया है।
(S) बैंक का 4,000 करोड़ (PNB) का 3,000 करोड़ और (SBI) का 11,000 करोड़ रुपए बकाया है। ICIC बैंक वोडाफोन कंपनी से 1,700 करोड़ और एक्सिस बैंक को 13,000 करोड़ रुपए लेने हैं। इंडसइड बैंक क़े 3,500 करोड़ (HDFC) 1,000 करोड़ रूपये बकाया है। यानी वोडाफोन आइडिया कंपनी क़े डूबने से बैंको को पर बड़ा असर होगा।

वोडाफोन – आईडिया का 22,000 करोड़ों रुपए टैक्स रद्द?

हालांकि चौतरफा बुरी खबरों के बीच vodafone-idea कंपनी को एक अच्छी खबर भी आई है, सरकार ने रेंट्रो टैक्स रद्द करने का फैसला किया है। इस टैक्स के रद्द होने से वोडाफोन – आईडिया को बड़ा फायदा होगा। वोडाफोन – आईडिया को रेंटो टैक्स के रूप में सरकार को कुछ नहीं देना होगा। वोडाफोन – आईडिया पर 8000 करोड़ों रुपए का रेंट्रो टैक्स लगाया गया था। जो पेनलटी की ब्याज की रकम जोड़कर ₹22,000 करोड़ों रुपए के आस-पास होगा। रेंट्रो एक तरह का कैपिटल गेन टैक्स जो पुरानी डील पर भी लगाया जा सकता है। वोडाफोन पर यह टैक्स हच के साथ डील में लगाया गया था। वोडाफोन आइडिया कंपनी अगर बंद हुई तो ग्राहको का क्या होगा। वोडाफोन – आईडिया के पास इस वक्त 28 करोड़ ग्राहक है, अगर कंपनी बंद होती है तो इनके नंबर बंद हो जाएंगे। इनको दूसरी कंपनियों की सेवाएं लेनी पड़ सकती हैं, वोडाफोन आइडिया क़ो इस वक्त बड़ी रकम की तुरंत जरूरत है। वोडाफोन – आइडिया को अगले साल 28,000 करोड़ों रुपए की देनदारी चुकानी है। NCDs का मूलधन ₹6,000 करोड़ रुपए प्रिंसिपल अमाउंट चुकाना है। मार्च 2020 तक (AGR) क़े 8,000 करोड़ चुकाने है, स्पेक्ट्रम फीस अप्रैल 2022 तक ₹8,200 करोड़ चुकानी है। अक्टूबर 2022 में फिर से स्पेक्ट्रम फीस (दूसरी किस्त) ₹2,900 करोड़ रुपए चुकानी है, वोडाफोन – आईडिया ₹2000 क़े दूसरे कर्ज भी है, जो उन्हें चुकाने है।

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