“संविधान, कोर्ट और कुर्सी – Jagdeep Dhankhar की विदाई की पूरी इनसाइड स्टोरी!”

Jagdeep Dhankhar के इस्तीफे की असली सच्चाई क्या है ?

“भारत में जहां नेता कुर्सी पकड़ने के लिए मरते हैं… वहां उपराष्ट्रपति (Jagdeep Dhankhar) ने कुर्सी छोड़ दी।
ध्यान रहे — ये कोई मामूली कुर्सी नहीं थी। ये थी राज्यसभा के सभापति की कुर्सी, देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद की कुर्सी।
और इस्तीफा भी यूं ही नहीं आया, इसके पीछे की कहानी बहुत गहरी है…”

Jagdeep Dhankhar ने इस्तीफा क्यों दिया है ?

“इस्तीफा उसी दिन आया, जब राज्यसभा में विपक्ष ने जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया। और धनखड़ ने उसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया।”अब ज़रा ध्यान दीजिए उस घटना पर, जो शायद उपराष्ट्रपति के इस्तीफे की सबसे बड़ी वजह बन गई।

Jagdeep Dhankhar के इस्तीफे से जस्टिस यशवंत वर्मा से क्या संबंध है ?

जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से ED ने बोरियों में कैश बरामद किया। रकम कितनी थी, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन खबरें आईं कि ये रकम करोड़ों में थी। हैरानी की बात ये रही कि इतनी बड़ी रिकवरी के बावजूद कोई एफआईआर नहीं, कोई गिरफ्तारी नहीं… और मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया।

यहीं से शुरू होती है उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की खुली नाराज़गी।
उन्होंने खुले मंच से कोलोजियम सिस्टम पर सवाल उठाए — पूछा कि क्या ऐसे जजों की जवाबदेही तय नहीं होगी?

क्या Jagdeep Dhankhar की बात लोगों को चुभने लगी थी ?

धनखड़ की ये बात सिस्टम के अंदर बैठे कई लोगों को चुभ गई।
और फिर आया सोमवार — जब विपक्ष ने राज्यसभा में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया।

और धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने उसे बिना किसी देरी के स्वीकार कर लिया।
ना सलाह-मशविरा, ना टालमटोल — जैसे वो इसी मौके का इंतज़ार कर रहे हों।
और बस, उसी दिन उन्होंने उपराष्ट्रपति (Jagdeep Dhankhar) पद से इस्तीफा दे दिया।
अब ये सिर्फ एक इत्तेफाक है… या अंदर ही अंदर बहुत कुछ पक रहा था — ये सवाल सबसे बड़ा है।”

Jagdeep Dhankhar ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर क्या कहा था ?

धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने बार-बार सुप्रीम कोर्ट के आर्टिकल 142 पर सवाल उठाए।
उन्हें ये मंज़ूर नहीं था कि सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति या राज्यपाल को डेडलाइन दे।
उन्होंने इसे ‘न्यूक्लियर मिसाइल’ कहा — लोकतंत्र के खिलाफ।

अब ज़रा सोचिए… उपराष्ट्रपति (Jagdeep Dhankhar) रहते हुए ऐसी बयानबाज़ी! साफ है, वो साइलेंट नहीं थे… वो सिस्टम से लड़ रहे थे।” “और फिर एक दिन अचानक इस्तीफा…
ना प्रेस कॉन्फ्रेंस, ना विदाई भाषण,
बस एक चिट्ठी, और सिस्टम को अलविदा!
अब सवाल है —

क्या Jagdeep Dhankhar के इस्तीफे के पीछे कोई राजनीतिक प्लान है ?

क्या ये स्वास्थ्य का मामला था,
या फिर सिस्टम से हार मानना?
या… कोई और बड़ा राजनीतिक ‘प्लान’?”
“धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने कुर्सी छोड़ी है… लेकिन सवाल पीछे छोड़ गए हैं।
और जब सवाल इतने गहरे हों, तो जवाब कभी प्रेस नोट में नहीं आते… वो वक्त देता है।
इंतज़ार कीजिए… ये कहानी अभी बाकी है।”

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