जानिए आखिर क्यों भारत सरकार ने अनाज के निर्यात पर रोक लगा दी ।

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अनाज

विश्व बाजार में अनाज की मांग तेज हो गई है।

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दुनिया में भर में खाद्य आपूर्ति पर संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में विश्व बाजार में अनाज की मांग तेज हो गई है।गेहूं की कमी पूरी करने के लिए दुनिया भर के देश गेहूं के सबसे बड़े उत्पादक देशों मे से भारत को उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे थे। लेकिन भारत नें अनाज के दामों को नियंत्रित करने के लिए फिलहाल उसके निर्यात पर रोक लगा दी है। भारत के इस फैसले पर जी-7 देशों ने भारत की आलोचना की है। आपको बता दें कि जी-7 दुनिया के वह सात शक्तिशाली देश है जो जी-7 ग्रुप के जरिए संगठित हैं। इसमें कनाडा,फ्रांस,जर्मनी, इटली, जापान,यूके और यूएस जैसे देश शामिल हैं। इन 7 देशों के जी-7 समूह ने भारत के गेहूं निर्यात पर रोक लगाने के फैसले की निंदा की है।

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अनाज के दाम को नियंत्रित करने के लिए लिया ये फैसला ।
हालांकि भारत ने यहां पर यह जरूर स्पष्ट किया है कि वह कमजोर देशों के साथ-साथ अपने पड़ोसी देशों के लिए गेहूं की आपूर्ति बंद नहीं करेगा। आपको बता दें कि गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला अनाज के दाम को नियंत्रित करने के लिए किया गया है। इसे लेकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की ओर से इससे जुड़ा एक खास बयान आया है उन्होंने अपने एक ट्वीट में यह बात साझा की है की देश में गेहूं का स्टॉक भरपूर मात्रा में है। लिहाजा उनके इस स्वीट से स्पष्ट है कि भारत के लोगों को इसे लेकर चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग की वजह से दुनिया में अनाज की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। ऐसे में दुनिया में गेहूं की मांग जहां बढ़ी है वहीं इसके दाम में भी तेजी देखी गई है।इन हालात के बीच भारत के गेहूं निर्यात पर रोक से जी-7 देश तिलमिला उठे है।

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G-7 देशो ने जताई चिंता 

जर्मनी में जी-7 देशो के कृषि मंत्रियों के साथ एक बैठक हुई है जिसमें इस बात को लेकर चिंता जताई गई है कि भारत के गेहूं निर्यात को प्रतिबंधित करने के फैसले से कमोडिटी की बढ़ती मांगों का संकट और गहरा सकता है इसके बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने ट्वीट के जरिए आश्वासन जताया कि भारत गेहूं निर्यात से जुड़ी अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को निभाएगा।

आपको बता दें कि भारत में इस तरह का फैसला अपनी खाद्य सुरक्षा खाद्यान्न की किफायती कीमतों को बनाए रखने और बाजार में तमाम तरह की संभावनाओं और अटकलों आदि से निपटने के लिए ही गेहूं के निर्यात को प्रतिबंधित करने का फैसला लिया है। इस बीच जी 7 देशों के कृषि मंत्रियों ने यह अपील की है की दुनिया में उपजे ऐसे हालात के बीच निर्यात प्रतिबंधों जैसे फैसले ना लिए जाए। इससे हालात और खराब हो सकते हैं।

उन्होंने इन सबके बीच बाजारों को खुला रखने और आयात निर्यात को भी नियमित रखने की अपील की है। भारत से गेहूं निर्यात को प्रतिबंधित करने के बाद जी -7 देशों की समूह की इस चिंता का सबसे बड़ा कारण यह है कि भारत दुनिया के गेहूं उत्पादक देशों में से दूसरा सबसे बड़ा देश है। ऐसे में भारत की ओर से ऐसे फैसले ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस खबर में फिलहाल इतना ही।

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