तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री Ponmudi ने हिंदी भाषा पर दिए गए अपने बयान पर सफाई दी है ।

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Ponmudi की ट्रोलिंग लगातार जारी।

तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री पोनमुड़ी (Ponmudi) ने हिंदी भाषा पर दिए गए बयान पर सफाई दे दी है। लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी ट्रोलिंग लगातार जारी है। लोग उन्हें हिंदी की महत्वता को समझा रहे हैं।

जानिए कुमार विश्वास ने इसपर क्या कहा ?

अभी से हिंदी भाषा के विवाद में हिंदी के जाने-माने कवि कुमार विश्वास भी कूद गए हैं। कुमार विश्वास ने के पोनमुड़ी (Ponmudi) पर तंज कसा है। कुमार विश्वास ने फेसबुक पर एक पोस्ट भी लिखी है और चार्टर्ड प्लेन के अंदर बैठकर गोलगप्पे खाने का फोटो भी डाला। इस फोटो के साथ कुमार विश्वास ने लिखा. ” हमारी तमिल मौसी के प्रिय पुत्र भाई के पोनमुड़ी जी हम हिंदी मां के बेटे बेटियां तो हर हाल मैं गौरवान्वित है भारतीय भाषाओं के यशस्वी परिवार में जन्म मिला। हम सब तो दक्षिण के अपने भाई बहनों की स्वाद ग्रंथियों को ऊर्जा जीने वाले गोलगप्पे बेच कर भी बहुत खुश हैं। और इस मां हिंदी की कृपा से हिंदी की कविताएं सुनाने चार्टर्ड प्लेन से यात्रा करते हुए चार्टर्ड प्लेन में गोलगप्पे खाकर तृप्त है। “

Ponmudi

कुमार विश्वास ने आगे लिखा कि तमिल बेहद समृद्ध और विकसित भाषा है आपको तो गौरवान्वित होना चाहिए कि हम और आप ऐसे भाषा परिवार का अंग हैं। और हां के पोनमुड़ी(Ponmudi) भाई, अपने क्षेत्रों में इटली डोसा बनाने वाले दक्षिणी बंधुओं को हम प्यार व आदर से “अन्ना”कहते हैं। जबान ठीक रखोगे भाई तो स्वाद भी ठीक रहेगा लव यू जय हिंद “।

बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को उच्च शिक्षा मंत्री पोनमुड़ी(Ponmudi) ने कहा, भाषा के रूप में हिंदी की तुलना में अंग्रेजी(English) अधिक मूल्यवान है। हिंदी भाषा का मजाक बनाने की कोशिश करते हुए कहा कि, हिंदी बोलने वाले तो पानी पुरी बेच रहे हैं। मंत्री के पोनमुड़ी(Ponmudi) ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार दो भाषाओं के फार्मूले की अपनी नीति जारी रखेगी।पोनमुड़ी ने कथित तौर पर हिंदी थोपने के प्रयास की आलोचना की।
साथ ही सवाल उठाए कि हिंदी भाषा सीखने वालों को क्या रोजगार मिलेगा। हालांकि बाद में उच्च शिक्षा मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि उनका बयान उत्तरी राज्यों में नौकरी की कमी के संदर्भ में था। ए एन आई(ANI) के मुताबिक मंत्री पोनमुड़ी (Ponmudi) ने कहा कि उत्तर के लोग यहां आते हैं और काम करते हैं क्योंकि उत्तरी राज्यों में कोई रोजगार नहीं है। इस खबर में फिलहाल इतना ही।

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