Uttarkashi Cloudburst : धराली में फटा बादल, 34 सेकेंड में बह गईं जिदंगियां, तबाही की खौफनाक कहानी

गायब हो गया पूरा धराली ? (Uttarkashi Cloudburst)

दिन 5 अगस्त 2025, समय 1 बजकर 45 मिनट, सिर्फ 34 सेकेंड और सब कुछ तबाह हो गया, उत्तराखंड का धराली (Uttarkashi Cloudburst) गायब हो गया।

उत्तराखंड के उत्तरकाशी के धराली गांव में पहाड़ से पानी का ऐसा सैलाब  (Uttarkashi Cloudburst) आया कि देखते ही देखते सब कुछ बह गया, क्या लोग, क्या होटल, क्या बाज़ार सब कुछ तबाह हो गया, किसी-किसी का तो पूरा घर ही पानी और मलबे में दब गया जिनकी अब सिर्फ छत दिखाई दे रही है। लेकिन क्या वाकई इसका कारण बादल फटना है या फिर कुछ और? अब तक 300 से ज़्यादा लोगों का रेसक्यू किया गया है, 5 लोगों की मौत की पुष्टि और 190 लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

Uttarkashi Cloudburst
Uttarkashi Cloudburst

क्या होता है बादल फटना? (Uttarkashi Cloudburst)

छोटे इलाके में कम समय में बहुत ज़्यादा बारिश होने को बादल फटना कहते हैं। ये बारिश इतनी तेज़ होती है कि मानो कि एक झरना अपनी पूरी तेज़ गती से बह रहा हो और ये देखने में बहुत भयावह होता है। इसलिए इसे हिंदी में बादल फटना और अंग्रेज़ी में cloudburst कहते हैं।
मौसम विभाग के अनुसार जब अचानक 20 से 30 वर्ग किलोमिटर के इलाके में 1 घंटे या उससे कम समय में 100mm या उससे ज़्यादा बारिश होती है तो उसे बादल फटना कहते हैं। आमतौर पर बादल कब फटेगा इसका अनुमान लगाना मुश्किल होता है।

बादल फटता क्यों है? (Uttarkashi Cloudburst)

बादल, सूरज की गर्मी के चलते समुद्र के ऊपर बने भाप के गुबार होते हैं, जो समुद्र की नम हवाओं के साथ बहकर धरती के ऊपर आते हैं। घने बादलों वाली ये नम हवा जब समुद्र से धरती पर पहुंचती है तो कहा जाता है कि मॉनसून आ गया।
मॉनसूनी हवाओं वाले बादल हिमालय से टकराकर धीरे-धीरे भारी मात्रा में जमा हो जाते हैं और एक ऐसा समय आता है कि किसी इलाके के ऊपर छाए हुए ये बादल पानी से भरी एक थैली की तरह फट (Uttarkashi Cloudburst) जाते हैं। यानी बहुत तेज़ी से एक छोटे से इलाके में बरस पड़ते हैं।

Uttarkashi Cloudburst
Uttarkashi Cloudburst

पहाड़ी इलाकों में ही बादल फटने से ज़्यादा तबाही क्यों होती है? (Uttarkashi Cloudburst)

बादल फटने की वजह से कम समय में पहाड़ों पर अधिक बारिश होने की वजह से पहाड़ टूट जाते हैं जिसकी वजह से पहाड़ों का सारा मलबा, मिट्टी तेज़ी से बहकर नीचे रिहायशी इलाकों में आ जाता है। ये सब इतनी तेज़ी से होता है कि लोगों को संभलने का वक्त भी नहीं मिलता और देखते ही देखते पहाड़ों से बड़ी-बड़ी चट्टानें और कंकड़-पत्थर बहुत तेज़ी से नीचे गिरते हैं जिस वजह से पहाड़ी इलाकों में ज़्यादा तबाही देखने को मिलती है।

क्लाइमेट चेंज बादल फटने का बड़ा कारण? (Uttarkashi Cloudburst)

कई रिसर्च ये बताती हैं कि क्लाइमेट चेंज बादल फटने (Uttarkashi Cloudburst) का एक बड़ा कारण है। वर्ल्ड मिटियोरॉजिकल ऑर्गनाइजशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘बीते 4 सालों से दुनिया का औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है। तापमान बढ़ने की दर के हिसाब से हिमालय के इलाके में बादल फटने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। बादल फटने की बढ़ती घटनाओं के चलते अचानकर बाढ़ आना, पहाड़ दरकना, मिट्टी का कटाव और ज़मीन धंसने के मामले भी बढ़ते जाएंगे।’

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