Sagar Mala Project : क्या है सागरमाला परियोजना ?

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Sagar Mala project

सागरमाला परियोजना (Sagar Mala project)

सागरमाला परियोजना (Sagar Mala project) जैसा कि हम सब जानते हैं, कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था (Economy) को तेजी से विकास करना होता है, तो वह देश सबसे पहले अपने देश के आधारभूत संरचना को मजबूत करता है। जिस देश की आधारभूत संरचना मजबूत होता है, उस देश का निर्माण क्षेत्र मजबूत अपने आप होने लगता है। परिवहन में कम पैसा लगता है,और तार्किक या लॉजिस्टिक में कम लागत आती है। आपस में जुड़ाव अच्छा और सस्ता होता है इन सब चीजों को देखकर दूसरे देश की कंपनी उस देश में निवेश करती है जिससे नौकरियां पैदा होती है बहुत सारी वस्तुओं की कीमत में कमी आती है। छोटी-छोटी कंपनी को भी फायदा होता है इससे संपूर्ण देश की अर्थव्यवस्था भी प्रगतिशील हो जाती है इसलिए कहा जाता है कि आधारभूत संरचना देश की रीड की हड्डी होती है।

Sagar Mala project

अभी कुछ समय पहले अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार! चल रही थी। उस समय दूसरी कंपनियां चीन को छोड़कर भाग रही थी। चीन से अपने चीन से अपने औद्योगिक कारखाने दूसरे देशों में ले जाकर लगा रही थी। ट्रेड वॉर के समय ज्यादातर कंपनी ताइवान वियतनाम जैसे देशों में जा रही थी। कुछ कंपनी ही हमारे देश भारत में आई थी क्यों भारत में इतनी कम कंपनी आई थी भारत में। जबकि भारत में श्रमिकों की लागत बहुत कम है।

भारत अपने आप में खुद इतना बड़ा बाजार है। इसका मुख्य कारण था कि आधारभूत संरचना जबकि भारत में श्रमिकों की लागत बहुत कम है। भारत अपने आप में खुद इतना बड़ा बाजार है। इसका मुख्य कारण था कि आधारभूत संरचना ताइवान वियतनाम थाईलैंड में आधारभूत संरचना बहुत अच्छी है। आपस में जुड़ाव भी अच्छा बहुत सस्ता है। वहीं भारत में लॉजिस्टिक की लागत बहुत ज्यादा है। हमारा आधारभूत संरचना इतना अच्छा नहीं है। यह बात भारत सरकार भी जानती है और सरकार इस मुद्दे को लेकर बहुत ज्यादा ही गंभीर है भारत सरकार आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए उसको अच्छा बनाने में लगी हुई है। रोड को जोड़ने के लिए भारतमाला परियोजना हो। माल गाड़ी की व्यवस्था करने व संचालन के लिए डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर हो या जलमार्ग के जुड़ाव के लिए सागरमाला परियोजना (Sagar Mala project) हो।

भारत ऐसी जगह पर स्थित है जहां से इस दुनिया का 13 फ़ीसदी की व्यापार होता है। एक अनुमान लगाया गया है। 2025 तक यह 16 फ़ीसदी हो जाएगा। भारत का व्यापार 90 फ़ीसदी हिंद महासागर के जरिए से होता है पर भारत हिंद महासागर का व्यापारिक मार्ग का पूरी तरह से फायदा नहीं उठा पा रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार ने सागरमाला परियोजना (Sagar Mala project) की शुरुआत करी है। सागर माला का प्रस्ताव अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा रखा गया था। 2003 में पर अगले साल सरकार बदल गई और यह परियोजना वही अटक गई। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी नींव 2015 में 31 जुलाई को रखी थी। सागरमाला एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसमें मरीन और नदियों के संसाधनों का प्रयोग करके देश में लाखों नौकरियां पैदा करना है और बड़ी मात्रा में आधारभूत संरचना का विकास करना है। सागरमाला परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारत के 7516 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा और 14500 किलोमीटर जलमार्ग और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पोर्ट को और ज्यादा विकसित करना है। उन्हें अत्याधुनिक भी करना है और नए पोर्ट को बनाना है जिसे लॉजिस्टिक क्षेत्र विकसित हो सके। भारत 90 % व्यापार पोर्ट के जरिए करता है। साल दर साल भारत का व्यापार भी बढ़ते जा रहा है। इससे भारत के पोर्ट पर अत्यधिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है। भारत में अभी प्रमुख पोर्ट हैं 12 और 200 अन्य पोर्ट भी हैं। इस बोझ को कम करने के लिए भारत सरकार ने पोर्ट को बनवा रही है। भारतमाला का मकसद नवाहन क्षेत्र का भी विकास करना है। अनुमान लगाया गया है कि इस परियोजना के पूरा होते ही सरकार को ₹40000 करोड़ हर साल की बचत होगी। सागरमाला का पूरा जिम्मा पोर्ट शिपिंग एंड वाटर मिनिस्ट्री ने लिया है ।

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सागरमाला परियोजना को चार हिस्सों में विभाजित किया गया।

कनेक्टिविटी एनहैंसमेंट(Connectivity Enhancement)
पोर्ट लिंक इंडस रिलाइजेशन(Port Link Indus Realization )
कोस्टल कम्युनिटी डेवलपमेंट(Coastal Community Development)
पोर्ट मॉडर्नाइजेशन (Port Modernization)

पोर्ट मॉडर्नाइजेशन (Port Modernization)

पोर्ट मॉर्डनाइजेशन पर 245 परियोजना पर काम किया जा रहा है। इनकी लागत 1.5 लाख करोड़ मानी जा रही है पोर्ट को अत्याधुनिक बनाने के 6 मेगापोर्ट को बनाया जा रहा है। पहले के पोट की क्षमता को भी बाहर जा रहा है। जिस हिसाब से भारत का व्यापार बढ़ रहा है, इसी हिसाब से 2025 तक 2500 मिलीयन टर्न कार्गो ट्रैफिक लगने लगेगा जो अभी 1500 मिलियन टर्न कार्गो है। पोर्ट में अधिक भार की समस्या ना हो उसकी क्षमता को बढ़ा रहे हैं। 2025 तक पोट की क्षमता 3500 मिलियन टर्न कार्गो की हो जाएगी।

पोर्ट इंडस्ट्रीलाइजेशन 57 प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। इसकी अनुमानित कीमत 5.2 लाख करोड रुपए बताई जा रही है। प्रोजेक्ट लिंक इंडसलाइजेशन के चलते भारत के तटीय क्षेत्र में 14 नए आर्थिक क्षेत्र या इकोनामी जॉन बनाए जाएंगे। इनमें इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट कोस्टलाइन और सोलर एंड विंड एनर्जी जेनरेशन ऑटो टेलीकॉम आईटी निर्माण इकाई बनाई जाएगी।

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कनेक्टिविटी एनहैंसमेंट(Connectivity Enhancement)

इसमें 210 परियोजना पर काम किया जाएगा। इन परियोजनाओं को अनुमानित लागत 2.8 लाख करोड़ रुपए बताई गई है। इसकी मदद से भारत के पोर्ट को डोमेस्टिक प्रोडक्शन कंजूमर सेंटर के साथ जोड़ा जाएगा। इसके अलावा तीन जलमार्ग के रास्ते की पहचान करी है जिसमें राज्यों के बीच राज्यों के बीच जल मार्ग द्वारा सामान की पहुंचाया जा सके। सागरमाला की मदद से भारत का सबसे बड़ा जल मार्ग रास्ता बनाया जा रहा है जो वाराणसी और पश्चिम बंगाल के हल्दिया के बीच होगा और इसकी अनुमानित कीमत 5369 करोड़ है। इसमें आधा पैसा भारत सरकार लगा रही है और आधा पैसा विश्व बैंक द्वारा लगाया जा रहा है। इसके अलावा जो कोस्टल इकोनामिक जोन बन रहे हैं, उन्हें इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के साथ जोड़ा जा रहा है। जैसे दिल्ली, मुंबई इंडस्ट्रियल, इकोनामिक कॉरिडोर और डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इन सब के जुड़ाव से वस्तुओं को आवाजाही बहुत तेज हो जाएगी। कोई भी सामान भारत में आएगा तो डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और भारतमाला दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल की मदद से देश के किसी भी कोने में आराम से पहुंच जाएगा और कोई समान भारत में बन रहा है। इन इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की मदद से पोर्ट तक आराम से पहुंच जाएगा। वहां से निर्यात हो जाएगा।

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कोस्टल कम्युनिटी डेवलपमेंट(Coastal Community Development)

कोस्टल कम्युनिटी डेवलपमेंट के अंदर 65 परियोजना पर काम किया जा रहा है। इसकी अनुमानित लागत ₹79 हजार करोड है। सागर माला से सबसे ज्यादा फायदा तटीय क्षेत्र के रहने वाले लोगों को होगा। प्रत्येक क्षेत्र में विकास बहुत तेजी से होगा। यहां पर इंडस्ट्रियल और यूनिट स्टेप होगी। इससे बहुत ज्यादा रोजगार आएगा। मछली पकड़ने वालो का विकास होगा। इससे पर्यटन बढ़ेगा। सागरमाला में पहले 574 प्रोजेक्ट थे पर 2019 में तीन और शामिल कर लिया गया अब इसमें 577 प्रोजेक्ट है इस परियोजना की अनुमानित कीमत 9.7 आंकी गई है।
30 सितंबर 2019 तक सागरमाला के 30 228 करोड रुपए के 121 परियोजना पूरी हो चुकी 313622 करोड रुपए के 235 परियोजना के तहत कार्यान्वयन है या अंडर इंप्लीमेंटेशन है और 102974 करोड रुपए के 137 में विकास जारी है या अंडर डेवलपमेंट मोड में है पूरे 577 परियोजना
पर में से 493 परियोजना या तो कुछ पूरे हो गए हैं या उन पर काम चल रहा है। बाकी 84 पर परियोजना का काम बाकी है। सागरमाला को पूरा करने की तारीख 2035 रखी गई है। पहले चरण को पूरा करने की समय सीमा 2025 है।

लेखक : आदर्श