Cancer के मरीजों को हुई कोरोना लॉकडाउन में सबसे ज्यादा परेशानी, हर 7 में से 1 मरीज की टाली गयी सर्जरी, मौत का आकड़ा भी बढ़ा, शोध में हुआ खुलासा।

कोरोना के समय में लगे लॉक डाउन की वजह से कैंसर (Cancer) के मरीजों को बहुत से दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। कोरोना महामारी अपने आप में एक तबाही मचाई हुई थी लेकिन उसके साथ-साथ कैंसर के इलाज के लिए मरीजों की कई सारी Cancer सर्जरी को टाल दिया गया था। एक आकड़े बताते है कि करीब हर एक हफ्ते में एक कैंसर (Cancer) मरीज की सर्जरी को कोरोना की वजह से टाल दिया गया था।

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कोरोना के समय में टाले गए कई सारे Cancer के मरीजों की सर्जरी

इन आकड़ों का दावा लैंसेट ऑन्कोलॉजी जर्नल में छपी एक रिसर्च में किया गया था। इस पर रिसर्च बताती है कोरोना के समय में लगे लॉकडाउन में कैंसर (Cancer) के मरीजों की सर्जरी टाली गयी जिसकी वजह से मौत का आंकड़ा बढ़ गया था। इस पर हुई रिसर्च इस बात की पुष्टि भी कर रही थी कि अगर इन मरीजों का सर्जरी समय पर होता तो उनकी जान बच जाती और मौत के आंकड़ों को रोका जा सकता था।

Cancer

61 देशों के 466 अस्पतालों में हुआ है यह शोध

इस पर पूरी रिसर्च यूके की वर्मिंघम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। यह सभी शोधकर्ता भारत समेत दुनिया के 61 देशों के 466 अस्पतालों के 20,000 से ज्यादा कैंसर (Cancer) के मरीजों पर शोध के बाद यह दावा किया है। इनमें से मरीज 15 सबसे कॉमन कैंसर से पीड़ित थे और इसमें अकेले भारत के 1566 मरीजों को शामिल किया गया था।

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कोरोना काल में 7 मरीजों में से 1 मरीज नहीं करा पाया अपनी Cancer की सर्जरी

इस रिपोर्ट में यह भी बात सामने आई कि कोरोना के कारण लगभग 7 में से 1 मरीज ऐसा था जो अपनी सर्जरी नहीं करवा पाया। कोरोना के उस दौर में निम्न मध्यम आय वर्ग वाले देशों के हालात बेहद बुरे थे। बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जेम्स ग्लासबे के मुताबिक जब लॉकडाउन लगा तो लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगाई गई लेकिन जिन मरीजों की सर्जरी होनी थी उनके लिए इस गाइडलाइंस में किसी भी प्रकार का कोई विकल्प नहीं था जो बेहद खतरनाक साबित हुआ।

सबसे कॉमन Cancer कौन – कौन से है?

शोधकर्ता ने बताया कि घरों से बाहर निकलने से रोका तो गया लेकिन जिन मरीजों की सर्जरी का विकल्प देना चाहिए था लेकिन उस गाइडलाइंस में उसका हिस्सा ही नहीं बनाया गया। जितने भी कैंसर (Cancer) मरीजों की सर्जरी को टाला गया वे सबसे कॉमन कैंसर से पीड़ित थे। इनमें से कोलोरेक्टल, इसोफेगल, गैस्ट्रिक, हेड एंड नेक, लिवर, पेन्क्रियाटिक, प्रोस्टेट, ब्लैडर, रीनल और ब्रेस्ट कैंसर कैंसर शामिल है।

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ब्रेस्ट कैंसर अब है सबसे कॉमन Cancer

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि ब्रेस्ट कैंसर (Cancer) अब सबसे कॉमन कैंसर बन गया है। अगर पिछले 20 सालों के आंकड़ों की बात करें उस समय फेफड़े का कैंसर सबसे कॉमन कैंसर माना जाता था लेकिन यह अब दूसरे पायदान पर आ गया है। WHO के कैंसर एक्सपर्ट आन्द्रे इलबावी बताती है कि 23 लाख मामले 2020 में ब्रेस्ट कैंसर के सामने आए थे जो कुल मामलों का 12% है। महिलाओं में होने वाले कैंसर का सबसे ज्यादा मामला ब्रेस्ट कैंसर का ही है।

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