Airtel Vs Jio : एयरटेल कैसे दे रहा है जिओ को टक्कर ।

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Airtel Vs Jio : दोस्तों 2016 इंडियन टेलिकॉम कंपनी का एक ऐसा आईकॉनिक इयर था, जिसे इतिहास में कभी भी भुलाया नहीं जा सकेगा। क्योंकि इसी साल मुकेश अंबानी ने अपनी टेलीकॉम कंपनी जिओ को लांच किया था, इसमें मार्केट में उतरते ही ऐसा धमाल मचाया कि इस इंडस्ट्री में सालो सें अपना पैर जमाए बड़ी बड़ी कंपनिया एक ही पल में आसमान से जमीन में आ गई थी। और उस समय एयरटेल ही एक ऐसी अकेली कंपनी थी, जिसने जिओ का डटकर मुकाबला किया था। आज की इस खबर में हम आपको बताएंगे, जो एयरटेल एक समय जिओ की वजह से बंद होने के दहलीज पर पहुंच गई थी, कैसे आज वही एयरटेल इस मुकाबले में अब जियो को पछाड़ ता हुआ नजर आ रहा है। दोस्तों मुकेश अंबानी ने 2016 में जिओ को लॉन्च करके एक ही झटके में पूरी इंडियन टेलीकॉम इंडस्ट्री को बदल कर रख दिया था, दरअसल जिओ नें अपने मोबाइल इंटर नेट और कॉलिंग प्लान्स इतने कम पर उतारे जिसकी किसी नें कल्पना भी नहीं की थी। और इसका नतीजा ये हुआ जिओ के मार्केट में आते हीं बड़ी संख्या में लोगों नें उसको अपनाना शुरू कर दिया।

दोस्तों यह जियो का ही कमाल था कि भारत के वे लोग भी इंटर नेट का इस्तेमाल करने लगे जिन्होंने इसका कभी नाम भी नहीं सुना हुआ था। और इसी के चलते सिर्फ 6 महीने के अंदर भारत दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल डेटा यूजर बन गया था, दोस्तों जिओ की कंपनी ने जबरदस्त प्लान के जरिए, ग्राहक दूसरी कंपनियों को छोड़कर जिओ की ओर शिफ्ट हो रहे थे। इस लिए अपने ग्राहकों को बनाए रखने के लिए दूसरी अन्य कंपनियों ने अपने प्लान्स के दाम घटा दिए इसका नतीजा यह हुआ कि इन कंपनियों को भारी भरकम नुकसान होने लगा। और उनके सियर्स बेहद तेजी से नीचे गिरने लगे कई कंपनीज बैनक्रॉफ्ट होकर बंद हो गई और कुछ कंपनियां जैसे तैसे कर के मार्केट में सरवाइव कर पाई जैसा कि हमने आपको बताया कि उस समय एयरटेल ही एक ऐसी कंपनी थी, जिसने जिओ का सही मायनों में मुकाबला किया था। हालांकि इस मुकाबले में एयरटेल भी बर्बाद होने के मुकाम तक पहुंच गई थी, लेकिन आज की अगर बात करें तो सभी को हैरान करते हुए इस रेस में अब एयरटेल जिओ से आगे निकलती हुई नजर आ रही है। दोस्तों ऐसे में यह सवाल उठता ही है. कि एयरटेल ने यह कारनामा आखिर कैसे किया।

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Airtel Vs Jio : एयरटेल कैसे करेंगा जिओ का मुकाबला ?

दरअसल इस सवाल का जवाब इको सिस्टम नाम के एक बिजनेस स्ट्रेजी के अंदर छुपा हुआ है। जिसे 21वी सदी की सबसे पावरफुल स्ट्रेजी में से एक माना जाता है. तो चलिए सबसे पहले हम यह जानते हैं. इको सिस्टम बिजनेस स्ट्रेजी क्या होता है। दोस्तों प्रोडक्ट्स और सर्विस इको सिस्टम नाम के इस स्ट्रेजी क़ो मशहूर बिजनेस मैन स्टीव जॉब्स के द्वारा डेवलप किया गया था। और इसी स्ट्रेजी की मदद से उन्होंने एप्पल को दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनीयों में से एक बनाया दरअसल कंपनी इसमें अपने अलग अलग प्रोडक्ट्स का एक ऐसा इकोसिस्टम बनाती है. एक बार उस कंपनी का कोई भी प्रोडक्ट इस्तेमाल करने के बाद उस यूजर्स के लिए दूसरे ब्रांड्स पर सिफ्ट होना बेहद मुश्किल हो जाता है। दोस्तों इसको समझ नें के लिए हम एप्पल के हीं एगो सिस्टम का एग्जांपल ले सकते हैं। जो की तीन अलग अलग अलेमेंट्स एंट्री लेवल प्रोडक्ट्स रिटेनर्स और अपसेंस को मिलाकर बनाया गया है. अब मान लीजिए आप एक आईफोन खरीदते है, तो उस बिजनेस स्ट्रेटजी के अनुसार ये आईफोन एंट्री लेवल प्रोडक्ट होगा। यानी इस प्रोडक्ट के जरिये एप्पल के इगो सिस्टम में एंटर कर देंगे, इसके बाद आप आईफोन क़ो इस्तेमाल करना शुरू करेंगे तो इसमें आपको बहुत सारे फीचर्स और एप्लीकेशन ऐसे देखने को मिलेंगे, जो सिर्फ और सिर्फ आईफोन में इस्तेमाल होते है।

जैसे आई मैसेज एप्पल प्रोडक्ट एप्पल Magnifying glass और एप्पल फिटनेस प्लस दोस्तों सिर्फ कुछ हीं दिनों में इस सभी फीचर्स को यूज करने की ऐसी आदत लगेंगी की आप चाह कर भी आईफोन से एंड्राइड पर सिफ्ट नहीं हों पाएंगे। यानी ये सभी फीचर्स एक तरह से रिटेर्न्स बन जायेगे, जिनके चलतें आप आईफोन क़ो चाह कर भी नहीं छोड़ पाएंगे। अगर आप एक बार इस रिटेनर्स के चंगुल में आ गए तो अप सेल भी खुद बा खुद हों जायेगा, क्योंकि जब आपका आईफोन पुराना होगा तो आप इन रिटेर्न्स के चलते अपने फोन क़ो अपडेट करने के लिए आईफोन का लेटेस्ट मॉडल खरीद लेंगे। इस तरह कस्टमर्स को अपनी कंपनी के साथ वादे रखने के इस स्ट्रेजी जी को प्रोडक्ट और सर्विस इको सिस्टम स्ट्रेजी कहते है। खैर दोस्तों यह तो हुई बात प्रोडक्ट और इको सिस्टम क्या होता है, लेकिन सवाल अब यहां तक है. आखिर जियो और एयरटेल का इससे क्या लेना देना है, दरअसल जियो और एयरटेल दोनों ही आज के समय में सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी ही नहीं रह गई बल्कि यह दोनों एक विशाल आकार के डिजिटल इको सिस्टम में बदलती जा रही है।

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Airtel Vs Jio : एयरटेल ने जिओ को कैसे दी टक्कर ।

Airtel Vs Jio : उदाहरण के लिए जब आप जिओ का एक सिम खरीद ते हैं. तो आप सिर्फ एक सिम ही नहीं खरीद तें बल्कि उसके साथ आपको जिओ की अलग अलग सर्विसेस जैसे :- जिओ टीवी, जिओ सावन, जिओ सिनेमा और जिओ क्रिकेट का सब्सक्रिप्शन भी मिलता है। इसी तरह जब आप जिओ फाइबर को खरीद तें हैं, तो उसके साथ आपको जियो का सेटअप बॉक्स फ्री दिया जाता है। यानी जब आप इनमें से कोई एक प्रोडक्ट खरीद तें हैं, तो वो जिओ के इको सिस्टम में एंट्री लेवल प्रोडक्ट का काम करता है। जिसके जरिए जियो के इस डिजिटल सिस्टम में आपको एंट्री हों जाती है. ऐसे में अगर कोई एक बार व्यक्ति जिओ की सर्विस को यूज करना शुरू कर देता है. तो उसके लिए जिओ क़ो छोड़ ना बेहद मुश्किल हों जाता है। और दोस्तों एयरटेल भी जिओ के सामने इसी वजह से टिका हुआ है. क्योंकि उसने जिओ के इस इको सिस्टम बिजनेस स्ट्रेजी क़ो बहुत जल्दी समझ लिया था। साथ हीं एयरटेल ने अन्य कंपनियों के मुकाबले अपने खुद के इको सिस्टम बनाने पर काफी तेजी से काम करना शुरू कर दिया था।

Airtel Vs Jio : दोस्तों अब सवाल यह आता है. कि एयरटेल आखिर इतने कम समय में अपना खुद का इको सिस्टम कैसे बना पाया इसके पीछे कई अलग अलग लॉजिकल रीजन है. दरअसल जियो के मार्केट में आने से काफ़ी समय पहले हीं एयरटेल कई अलग अलग बिजनेस और सर्विसेस में अपने पैर जमा चुका था। जिसमे एयरटेल डीटीएच, एयरटेल ब्रॉडबैंड और एयरटेल बिजनेस का नाम शामिल है. अपनी इन्हीं जमी जमाई सर्विसेस की वजह से एयरटेल अपनी दूसरी कंपनी जैसे आईडिया और वोडाफोन की तुलना में अपने खुद के इको सिस्टम क़ो कहीं ज्यादा तेज रफ्तार में बनाया है। इसके अलावा जियो से सामना करने के लिए एयरटेल नें कुछ ऐसे गोल्डी स्टम्स भी लिये जिन्हे लेने का साहस दूसरी कंपनियां नहीं दिखा पाई इसमें सबसे पहले एयरटेल ने अपने से छोटे बिजनेस जैसे वीडियोकॉन टेलीकॉम, टेलीनॉर और टाटा टेली सर्विसेस को खरीदना शुरू कर दिया। इसके बाद एयरटेल का दूसरा गोल्ड स्टेप था, कि उन्होंने अपने कनेक्शन पर एक मिनिमम रिचार्ज लिमिट सिलेक्ट कर दी ताकि वह अपना पूरा फोक्स सिर्फ हाई वैल्यू कस्टमर्स पर रख सके हालांकि अपने इस फैसले की वजह से एयरटेल नें 2018 के आखिरी क्वार्टर में 4.8 करोड़ कस्टमर्स खो दिए लेकिन लोंग रन में ये स्टेप उनके लिए फायदेमंद ही साबित हुआ।

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Airtel Vs Jio : एयरटेल नें फिर से जिओ क़ो छोड़ा पीछे।

 

Airtel Vs Jio : इसके बाद लास्ट में तीसरा आत्मविश्वासी फैसला लेते हुए जिओ कि तरह अपना खुद का इको सिस्टम बनाना शुरू कर दिया। दोस्तों यही वह समय था जहां से गेम बदलना शुरू हों गया क्योंकि एयरटेल नें भी जिओ की तरह अपने एयरटेल फाइबर के साथ सेटअप बॉक्स और अपनी सिम के साथ में विंक म्यूजिक और एयरटेल टीवी जैसी सर्विसेज देना शुरू कर दिया था। लेकिन एयरटेल के लिए जो सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ वो था कोरोना हमामारी दरअसल कोरोना संक्रमण की वजह से ज़ब लॉकडाउन लगा तो देश भर में वर्क फ्रॉम होम स्टडी के लिए हाई स्पीड इंटरनेट की डिमांड हद से ज्यादा बढ़ गई ऐसे में मौके का फायदा उठाते हुए एयरटेल 119 अभी b2b एंटर प्राइस क्लाइंट व उनके सारे एंप्लाइज को हाई स्पीड देने का ऑफर दे डाला। इसके बाद एयरटेल ने बहुत सारे अलग-अलग लोकल केबल ऑपरेटर्स के साथ भी हाथ मिलाया और उन्हें टियर 2 और टियर 3 शहरों तक शहरों तक अपनी लाइंस पहुंचाने के लिए लुभावने ऑफर्स भी दिए इस तरह एयरटेल नें सिम की जगह अपने ब्रॉडबैंड को एक एंट्री लेवल प्रोडक्ट के रूप में इस्तेमाल किया ताकि उसके जरिए ज्यादा से ज्यादा लोग एयरटेल का हिस्सा बन सके।

दोस्तों एयरटेल कि ये रणनीति उसके लिए काफी कारगर साबित हुई क्योंकि सितंबर 2020 में जहां जिओ फाइबर सिर्फ 17 लाख कस्टमर्स को हासिल कर पाया एयरटेल ने 70 लाख नए ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर को कैप्चर कर लिया जिसमें काफी सारे यूजर्स ऐसे भी थे। जिन्होंने ब्रॉडबैंड के साथ एयरटेल डीटीएच और एयरटेल सिम को भी अपना लिया दोस्तों वायरलेस सब्सक्राइबर के मामलों में भी एयरटेल लगातार जिओ को पीछे छोड़ते हुए नजर आ रहा है। उदाहरण के लिए जनवरी 2021 में एयरटेल ने जहां 59 लाख नए वायरलेस सब्सक्राइबर्स जोड़े थे, वही जियो सिर्फ 19.5 लाख नये सब्सक्राइबर्स ही जोड़ पाया था। इस तरह सभी आंकड़ों और एयरटेल की पिछली परफॉर्मेंस को देखते हुए ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में एयरटेल जिओ को पीछे छोड़ कर टेलीकॉम इंडस्ट्री का किंग बन सकता है, जो वह जिओ के आने से पहले हुआ करता था।

 

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