बंगाल हिंसा में हुए पलायन को लेकर SC ने ममता सरकार से मांगा जवाब।

पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद जिस तरह से ममता बनर्जी की तीसरी बात जित हुई वो कबीले तारीफ़ थी। लेकिन चुनावी नतीजे आने के बाद जिस तरह से पुरे राज्य में हिंसा हुई वो बेहद डरावनी और लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक बात है। इस हिंसा में बहुत से लोगोंने अपनी जान गवाई। TMC के कार्यकर्ता BJP के दफ्तर और उनके कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतारने लगे ऐसे में लोग अपनी जान बचने के लिए पलायन करने के लगे। इसके बाद ये मामला SC गया और सुप्रीम कोर्ट ने अब जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट में इस पलायन के मामले को लेकर एक याचिका पर सुनवाई किया। सुप्रीम कोर्ट में हिंसा से पीड़ित लोगों ने SIT जांच की मांग करते हुए एक याचिका डाली थी। इस याचिका में लोगों ने SC से अनुरोध किया था हिंसा के वजह से लोगों के पलायन को रोकने के आदेश दिए जाए। और इसकी जांच करने के एक टीम बने और जो लोग भी इस तरह के हिंसा में शामिल होने वाले लोगो पर कार्यवाही हो।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विनीत शरण और बी आर गवई की पीठ ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राष्ट्रीय महिला आयोग को इसमें पक्षकार बनाने का आदेश भी दिया। याचिका देने वालों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया की NHRC और ंकव ने पहले भी इस मामले की जांच की है। इस अगली सुनवाई अब 7 जून को होने वाली है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से इस मामले की वकील पिंकी आनंद ने बताया की हिंसा के कारण आंतरिक रूप से विस्थापित हए पीड़ित व्यक्तियों के लिए आवश्यक राहत का पता लगाने के लिए इन आयोगों को प्रतिवाद बनाना जरूरी है।

इस याचिका में दावा किया गया है की हिंसा के वजह से लोगों का सामूहिक पलायन हुआ है। इसमें राज्य के गुंडे और पुलिस दोनों आपस में मिले हुए है और यही कारण है की पुलिस इस मामले की जांच नहीं कर रही है। पुलिस लोगों को सुरक्षा प्रदान नहीं कर पा रही है ऐसे में लोगों के अंदर एक डर का माहौल बना हुआ है। उस याचिका में कहा गया की इस डर के वजह से लोगों को पलायन करना ही उचित लगा ‘ये लोग बंगाल के निवासी होने के बावजूद भी ये शिवरों और आश्रय गृहों में रहने को मजबूर है। इस याचिका में दावा में किया गया है की एक लाख से ज्यादा लोगों ने पलायन किया है। 

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