देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना (Coronavirus Omicron Variant) के एक लाख से ज्यादा केसेज रिकॉर्ड किए गए हैं, और मरने वालों का आंकड़ा 300 के पार रहा सिर्फ एक हफ्ते में कोरोना (Coronavirus) केसेज 485 फीसदी यानी कि 10 गुना ज्यादा बढ़ गए हैं। ज्यादातर नए मामलों में ओमिक्रॉन वेरिएट (Omicron Variant) ही मिल रहा है, और यही वजह है कि महाराष्ट्र में तों अब नए केसेज की जिनोम सीक्वेंसिंग को बंद कर दिया गया है। हालांकि ओमिक्रॉन (Coronavirus Omicron Variant) कितना खतरनाक हो सकता है, इस पर लगातार विश्लेषण और अध्ययन जारी है। नए वेरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर अच्छी खबर इन्हीं विश्लेषण और अध्ययन में सामने आई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) की तीसरी लहर में मरीजों को कम वक्त के लिए बुखार आ रहा है जो लोग भी तीसरी लहर में ओमिक्रॉन वेरिएट (Coronavirus Omicron Variant) के चलते संक्रमित हो रहे हैं उनमें बुखार 02 से 03 दिन में ठीक हो रहा है। लेकिन ओमिक्रॉन (Coronavirus Omicron Variant) फेफड़ों का क्या हाल कर रहा है, क्योंकि दूसरी लहर में हमने देखा था कि फेफड़ों का डेल्टा वेरिएंट ने सबसे बुरा हाल किया था। चलिए आपको ये बताते हैं की कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट (Coronavirus Omicron Variant) का फेफड़ो पर क्या असर होता है ।
ओमिक्रॉन वेरिएंट (Coronavirus Omicron Variant) फेफड़ों पर क्या असर डालता है ?
देश में कोरोना वायरस की पहली और दूसरी लहर की शुरुआत महाराष्ट्र से हुई ओमिक्रॉन के सबसे ज्यादा मामले भी यही है। महाराष्ट्र की कोविड टास्क फ़ोर्स ने कहा है कि ओमिक्रोन ने खतरे के बीच राहत भरी खबर यह है कि जो भी मरीज मौजूदा लहर में संक्रमित हो रहे हैं उनके फेफड़ों पर असर कम हो रहा है। कोविड टास्क फ़ोर्स के एक्सपर्ट्स ने इस बार नोटिस किया कि इस बार ज्यादा तर संक्रमित लोगों के चेस्ट की सीटी स्कैन नॉर्मल आ रही है। लेकिन इसके बावजूद भी आपके मन एक सवाल जरूर उठ रहा होगा कि जब मौजूदा वक्त में दूसरी लहर के मुकाबले संक्रमण रेट ज्यादा है कोरोना कि r-value ज्यादा है। तो फिर तीसरी लहर कोरोना वायरस की दूसरी लहर से हल्की कैसे हो सकती हैं। इस सवाल का जवाब देते हुए महाराष्ट्र के कोविड-19 टास्क फ़ोर्स के सदस्य डॉ शशांक जोशी ने अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत की। जिसमें उन्होंने बताया कि अभी की कोविड सर्ज और डेल्टा वेंव में बड़ा फर्क यह है कि इस बार ज्यादातर मरीजों के फेफड़ों पर कोरोना कोई असर नहीं कर रहा। जो भी इन्फेक्शन मिलता है श्वास नली से आगे नहीं बढ़ता और बुखार बेहद कम वक्त तक रहता है कभी कभी तो सिर्फ 72 घंटों में ही चला जाता है।
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ओमिक्रॉन से संक्रमित शक्स को क्या-2 होती है दिक्कतें?
जबकि डेल्टा वेरिएंट में लंबे वक्त तक तेज बुखार रहता था। कभी-कभी तो डेल्टा वेरिएंट से संक्रमित शक्स को बुखार उतरने में हफ्तों का वक्त लग जाता था।इसके साथ ही कोविड टास्क फ़ोर्स के सदस्य बताते हैं कि पिछले 3 हफ्तों में आए ओमिक्रॉन मरीजों को देखने पर पता चलता है कि कोरोना वायरस के लक्षण ज्यादा तर मरीजों में 2 से 5 दिन तक ही रहते हैं। इनमें गले में खराश, जलन या खुजली रहती है इसके अलावा मरीजों को बुखार, सिर दर्द या बदन दर्द रहता है। मरीजों को बलगम के साथ खांसी, नाक बहना, चक्कर आना, मांसपेशियों में दर्द लगातार थकान महसूस होती है। लेकिन सेंस आफ स्मैल सेंस ऑफ टेस्ट बरकरार रहता है वही मरीजों को बुखार दो या तीन दिन से ज्यादा नहीं रहता। पिछली बार की कोरोना लहरों में हमने देखा था कि कैसे कोरोना का डेल्टा और प्राइमरी वेरिएंट फेफड़ों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा था। ठीक हुई मरीजों को फेफड़ों को ठीक होने में महीनों का वक्त लग जाता था लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। महाराष्ट्र की कोविड-19 टास्क फ़ोर्स का कहना है कि इस जिन मरीजों को माइल्ड कोविड-19 हुआ उनको सीटी स्कैन कराने की सलाह नहीं दी जाती। फिर भी जो लोग टेस्ट करा रहे हैं उनमें 90 से 95 प्रतिशत लोगों की रिपोर्ट नॉर्मल आ रही है।
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