भारत के 20 करोड़ मुसलमान मोदी सरकार से जो नहीं करा पाए, वो इन मुस्लिम देशों ने करा दिया!

केंद्र की मोदी सरकार भले ही अच्छा काम कर रही हो जनता की उम्मीदों पर खरी उतर रही हो लेकिन एक आरोप उसे बार-बार झेलना पड़ता है और यह आरोप ना सिर्फ विपक्ष लगाता है बल्कि कई मुस्लिम संगठन भी इस तरफ ध्यान देने की मांग कर चुके हैं। यह आरोप है मुसलमानों के तुष्टीकरण का उनके साथ भेद-भाव करने का हालांकि ऐसा नहीं कि भारत का हर एक मुस्लिम बीजेपी के खिलाफ हों अगर ऐसा होता तो शायद मोदी का साल 2019 में चुनाव जीतना मुश्किल होता लेकिन ऐसा नहीं हुआ जनता ने एक बार फिर बीजेपी पर भरोसा जताया और नरेंद्र मोदी शीर्ष तक पहुंचाया। लेकिन नूपुर शर्मा के एक बयान नें जिस तरह का रोष पैदा किया उसके बाद एक बार फिर से बीजेपी पर सवाल खड़े हो गए सरकार को एक्शन लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही साथ यह भी सवाल उठ रहे हैं कि बीजेपी ने नूपुर के इस तरह के बयान आने के तुरंत बाद ही उन पर एक्शन क्यों नहीं लिया हालांकि बीजेपी अपने तरफ से कठोर एक्शन ले चुकी हैं।

इस्लामिक देश डाल रहे हैं भारत पर दबाव !

उनके बयान से किनारा कर चुकी है और किस तरह के बयान का पार्टी भी समर्थन नहीं करती है लेकिन रोष थमने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन रोष थमने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है चिंता की बात यह है कि पैगंबर मोहम्मद और उनकी पत्नी दिए गए नूपुर के विवादित बयान की निंदा भारत ही नहीं बल्कि कई और इस्लामिक देशों में भी हो रही है। अरब देशों के साथ-साथ खाड़ी देश भी भारत का विरोध कर रहे हैं और उसे आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मन बना चुके हैं। इन देशों ने भारत में मुसलमानों की स्थिति पर मोदी सरकार को ध्यान देने की नसीहत तक दे डाली है। अब कहा जा रहा है कि अबतक सरकार इसे नजरअंदाज कर रही थी लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण वह इस मसले पर ध्यान देने पर मजबूर हो गई है। यानी जो काम भारत के 20 करोड़ मुसलमान नहीं करा पाए वो काम इस्लामिक देशों ने करा दिया है। जाहिर है नूपुर की टिप्पणी नें दुनिया भर के मुसलमानों को नाराज किया है।

मुसलमानों के सामने झुकें पीएम मोदी

अब क्योंकि वह बीजेपी से ताल्लुक रखती थी। एक ऐसी पार्टी जिस पर पहले से ही मुसलमानों के साथ भेद-भाव का आरोप लगता रहा है तो ऐसे में बीजेपी की किरकिरी होनी ही बनती थी। ऐसा लग रहा है कि इस बार तो विदेश मंत्री एस जयशंकर के हाजिर जवाबी भी काम नहीं आई। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत में मुसलमानों को कुछ भी कह दिया जाता है। कभी जिहादी कभी पत्थर फेंकने वाला कभी कोविड वाली जमात और इन मुद्दों को कोई उठाए तो उसे देशद्रोही तक कह दिया जाता है। विदेश से इस मामले पर कोई बोले तो इसे भारत का आंतरिक मामला बताकर दरकिनार कर दिया जाता है लेकिन जब इस्लाम और उनके सबसे बड़े पैगंबर की आएगी तो इस्लामिक देश इसे भारत का आंतरिक मामला समझ कर चुप थोड़ी रहेंगे। यही वजह है कि अब कहां जाने लगा है कि सरकार मुसलमानों के प्रति थोड़ी नरमी दिखाई दी और दिखाने भी चाहिए। सबसे हैरानी की बात यह है कि मुसलमानों के लिए मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में कितने बड़े ऐलान किए लेकिन फिर भी उन पर इस तरह के आरोप लगते रहे हैं। विरोधी कहते हैं मोदी सरकार को मुसलमानों की भावनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता खैर अब देखना होगा यह विवाद आगे कहां तक जाएगा।