सोमवार को SUPRIME COURT में जारी एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और ICMR समेत अन्य को नोटिस जारी किया है। SUPRIME COURT द्वारा जारी इस नोटिस में कहा गया है कि कोरोना के क्लिनिकल ट्रायल्स के सभी आंकड़े और टीकाकरण के बाद होने वाले सभी प्रभावों के आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इस याचिका में विभिन्न सरकारों द्वारा अनिवार्य रूप से टीकाकरण के निर्णय पर भी रोक लगाने की मांग की गई थी।
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2 जजों की पीठ ने की इस याचिका पर सुनवाई
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इस याचिका पर जस्टिस नागेश्वर राव और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने सुनवाई की। 2 जजों की बेंच ने इसे टीकाकरण के राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार के पूर्व सदस्य डॉक्टर जैकब पुलियेल के द्वारा यह याचिका दायर की गई थी। SUPRIME COURT ने इस याचिका पर केंद्र भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया और वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक लिमिटेड और सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया गया। नोटिस जारी करते हुए लिखा गया 4 सप्ताह के भीतर इन सभी लोगों को अपने जवाब देने होंगे।
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क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़े आने से लोगो में संदेह की स्थिति कम होगी – SUPRIME COURT
SUPRIME COURT ने कहा अगर टीकाकरण के बाद आने वाले प्रभाव और क्लिनिकल ट्रायल के आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाता है, तो जो 50 करोड़ लोगों ने टीकाकरण कराया है उनके मन में किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं होगा। जजों की पीठ ने कहा कि जितने लोग टीकाकरण कराएं हैं उनके मन में टीकाकरण के बाद होने वाले प्रभाव को लेकर संदेह है। इसलिए क्लिनिकल ट्रायल्स के आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए ताकि लोगों के मन से यह संदेह बाहर निकल जाए।
अनिवार्य रूप से टीकाकरण वाले फैसले पर कोर्ट करेगी विचार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा अगर सार्वजनिक आंकड़ों को देखकर लोगों के मन से संदेह निकल जाता है तो बाकी लोगों को टीका लगवाने में भी संदेह नहीं होगा मगर अगर ऐसा नहीं होता है तो लोगों में टीका लगवाने को लेकर हिचकिचाहट बनी रहेगी।
अनिवार्य रूप से टीकाकरण पर रोक लगाने की मांग को लेकर SUPRIME COURT ने किसी भी तरह का कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले को सुनाते हुए कहा कि टीकाकरण जारी है और हम इसे रोकना नहीं चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम आपके द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं का परीक्षण करेंगे उसके बाद अपना अंतरिम आदेश पारित करेंगे।
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SC ने याचिका की सराहना की
SUPRIME COURT में याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रशांत भूषण है। इस याचिका में सुनवाई के दौरान दो जजों की पीठ ने बताया की इस याचिका में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उठाए गए हैं और टीकाकरण के बाद के प्रभाव के आंकड़े में पारदर्शिता लाने की चिंता करने की सराहना कोर्ट करती है।
प्रशांत भूषण ने अपनी याचिका में यह बात स्पष्ट लिखा था कि यह एंटी वैक्सीन याचिका नहीं है लेकिन क्लिनिकल ट्रायल और टीकाकरण के बाद के प्रभाव का खुलासा सार्वजनिक कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने आईसीएमआर के बनाए नियमों का हवाला देते हुए कहा कि इस नियम के अनुसार प्रांत के आंकड़ों को सार्वजनिक करना आवश्यक है।
वकील प्रशांत भूषण ने SUPRIME COURT में क्या कहा?
प्रशांत भूषण ने अपनी याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि बहुत से सरकारी विभागों में टीकाकरण को अनिवार्य कर दिया गया है। कई जगह तो ऐसा कहा गया कि जो लोग को रोना का टीकाकरण नहीं कराएंगे उनको उनके सेवाओं से वंचित कर दिया जाएगा।
प्रशांत भूषण की मुद्दे पर पीटने सवाल करते हुए पूछा कि क्या सार्वजनिक स्वास्थ्य हित पर व्यक्तिगत स्वायत्तता को प्राथमिकता दी जा सकती है? न्यायमूर्ति ने बताया कि हम आपकी बात को बिल्कुल स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि आप जनहित के बजाय व्यक्तिगत लाभ पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक सभी को टीका नहीं लग जाता तब तक कोई भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं है।
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