GST के दायरे में आएंगे DIESEL – PETROL ? कल सरकार ले सकती है बड़ा फैसला, जाने GST के दायरे में आने से क्या होगा लाभ?

DIESEL – PETROL को GST में लाने का फैसला कल

कल यानी 17 सितंबर 2021 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में GST (Goods and Services Tax) परिषद की बैठक होने वाली है। कोरोना वायरस महामारी के बीच GST (Goods and Services Tax) परिषद कि यह 45 वी बैठक बेहद अहम और खास माना जा रहा है। इस बैठक को बेहद अहम और खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बैठक के दौरान कोरोना से संबंधित आवश्यक सामान पर रियायत ही दरों की समीक्षा भी हो सकती है। चर्चा यह भी है की DIESEL – PETROL को GST के दायरे में लाया जा सकता है।

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GST के दायरे में आ सकते है DIESEL – PETROL

इस बैठक पर सभी की नजरें इसलिए भी बनी हुई है क्योंकि इस बैठक में एक या एक से अधिक पेट्रोलियम पदार्थों, पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस और एविएशन टर्बाइन फ्यूल को जीएसटी के दायरे में लाने पर फैसला हो सकता है। इस बैठक के दौरान राज्यों के राजस्व नुकसान पर मुआवजे की भी चर्चा होने की उम्मीद है।

GST

कॉमन इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल भी कल हो सकता है लांच

सूत्रों के हवाले मिली खबर के अनुसार इस बैठक के दौरान GST परिषद से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए कॉमन इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल भी लांच किया जा सकता है। कोरोना महामारी के बीच डीजल और पेट्रोल (DIESEL – PETROL) के दाम बेतहाशा बढ़ रहे थे। डीजल और पेट्रोल (DIESEL – PETROL) कई राज्यों में ₹100 से अधिक प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इसलिए सरकार अब इनको जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार कर सकती हो। एक या एक से अधिक पेट्रोलियम पदार्थ पेट्रोल-डीजल और विमानों को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार सरकार जीएसटी परिषद की बैठक में कर सकती है।

केरल हाई कोर्ट ने DIESEL – PETROL को GST के दायरे में लाने को दिया था आदेश 

आपको बता दें कि केरल हाई कोर्ट की ओर से पेट्रोल व डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का आदेश दिया गया था। इसके बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि 17 सितंबर को इस पर जीएसटी काउंसिल की बैठक के दौरान कुछ फैसला लिया जाएगा। काउंसिल ने अभी तक उस तारीख की घोषणा नहीं की थी की कब DIESEL – PETROL पर GST लागू होगीं। एक अधिकारी के मुताबिक जीएसटी काउंसिल के उच्च अधिकारी, पेट्रोलियम पदार्थों पर GST लाने को तैयार नहीं हो रहे हैं।

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GST के दायरे में आने से दामों होगी भारी गिरावट

वित्तीय वर्ष 2019-20 में पेट्रोलियम पदार्थों से राज्य व केंद्र सरकार को 5.55 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ था। इनमें से डीजल व पेट्रोल से ही सबसे ज्यादा राजस्व सरकारों को मिला है। अगर एक बार इन डीजल व पेट्रोल (DIESEL – PETROL) को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो इनके दामों में बारिश गिरावट होगी। अगर बात करें तो केंद्र सरकार पेट्रोल पर 32 फ़ीसदी तो राज्य सरकार 23.07 फ़ीसदी टैक्स ले रही है। अगर डीजल की बात करें तो केंद्र सरकार इस पर 35 फ़ीसदी था राज्य सरकारें 14 फ़ीसदी ज्यादा टैक्स वसूल रही है।

इस बैठक में दवाओं के टैक्स पर भी छूट देने पर होगा फैसला

सूत्रों के मुताबिक इस बैठक के दौरान कोरोना उपचार से शुरू जुड़े उपकरणों व दवाइयों कॉपी टैक्स में छूट दी जा सकती है इससे पहले 12 जून को जीएसटी परिषद के 44 में बैठक हुई थी। इस बैठक में कोरोना वायरस में काम आने वाले उपकरण और दवाइयों पर जीएसटी की तरह 30 सितंबर 2021 तक घटाई गई थी। इस बैठक के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में टीके पर पांच फ़ीसदी की टैक्स दर को कायम रखने पर सहमति बनी थी।

एम्बुलेंस पर लगने वाली GST दर को किया गया था कम 

एंबुलेंस पर लगने वाली जीएसटी की दर को 28 फ़ीसदी से घटाकर 12 फ़ीसदी किया गया था। यह बैठक लखनऊ में होने वाली है और जीएसटी से जुड़े सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल लांच करने पर भी फैसला किया जा सकता है। इस पोर्टल के लांच होने के बाद जीएसटी पंजीकरण, कर भुगतान, रिटर्न भरना, आईजीएसटी सेटलमेंट का काम एक ही पोर्टल के जरिए किया जाएगा। इसके अलावा इस पोर्टल के जरिए मौजूदा ग्राहकों को आधार सत्यापन की सुविधा भी दी जा सकती है।

कैसे होता है DIESEL – PETROL के दाम तय ?

जून 2010 तक सरकार पेट्रोल की कीमत निर्धारित करती थी और हर 15 दिन में इसे बदल दिया जाता था। लेकिन 26 जून 2010 के बाद सरकारों ने पेट्रोल की कीमतों का निर्धारण ऑयल कंपनियों के ऊपर छोड़ दिया। और इसी तरह से अक्टूबर 2014 तक डीजल की कीमतों पर भी सरकार निर्धारित किया करती थी लेकिन 19 अक्टूबर 2014 से सरकार ने यह काम भी तेल कंपनियों के ऊपर छोड़ दिया।

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यानी कि साफ शब्दों में कहा जाए तो पेट्रोलियम प्रोडक्ट की कीमतों का निर्धारण करने में सरकार का कोई भी नियंत्रण नहीं रहा, सारा काम ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ही करने लगी थी। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों, एक्सचेंज रेट, टैक्स, पेट्रोल डीजल (DIESEL – PETROL) ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और बाकी कई चीजों को ध्यान में रखते हुए रोजाना डीजल पेट्रोल की कीमतों को निर्धारित किया करते हैं। इसके वजह से हर दिन डीजल और पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी होती रहती हैं।

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