Lakhimpur Kheri Voilence Upadte : राज्य सरकार ने किसानों की मानी मांग, मृतक किसानों के परिवार को दिए 45 लाख फिर विपक्षी पार्टिया क्यों कर रही है राजनीति? राहुल, प्रियंका को लखीमपुर जाने के लिए मिली इजाजत।

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Lakhimpur Kheri

अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है। विधानसभा चुनाव से पहले लखीमपुर खीरी में एक बड़ा हादसा (Lakhimpur Kheri Voilence) होता है। इस लखीमपुर खीरी में हुए हादसे को लेकर अब सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी अपनी राजनीतिक रोटियां को सेकने में लगी है। इस पूरे हादसे की खबर हमने आपको पहले बताई थी लेकिन आज हम उन पहलुओं पर नजर डालेंगे कि कैसे सभी राजनीतिक दल अपने अपने राजनीतिक फायदे के लिए लाशों पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का काम कर रहे हैं।

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Lakhimpur Kheri Voilence के दौरान 9 लोगों की हुई थी मौत

3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri Voilence) में एक थार गाड़ी आंदोलन कर रहे किसानों के ऊपर चढ़ाई जाती है जिसकी वजह से करीब 9 लोगों की मौत हो जाती है जिसमें 4 किसान शामिल थे। इन किसानों की मौत के बाद से पूरे देश में राजनीतिक उबाल शुरू हो जाता है। सभी विपक्षी दल के नेता लखीमपुर खीरी जाने के लिए तैयारी में जुट जाते हैं। पूरे मामले को बढ़ता देख उत्तर प्रदेश की सरकार किसी भी नेता को लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri Voilence) जाने से रोकने की पूरी कोशिश में लग जाती है।

Lakhimpur Kheri Voilence

मृतक किसानों को राज्य सरकार ने दिए 45-45 लाख रूपये

किसानों की मांग थी और उस मांग को राज्य सरकार ने पूरा भी कर दिया। सभी मृतक किसानों को 45-45 लाख रुपए दे दिए गए और उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी दी जाएगी। लेकिन जब राज्य सरकार सभी मांगों को पूरी कर दी है तो फिर विपक्षी पार्टिया अब राजनीतिक रोटियां क्यों सेक रहे हैं ये एक बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है।

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Lakhimpur Kheri Voilence की जगह पार जाने के लिए निकले नेताओं को रास्ते में रोका गया

किसान नेता राकेश टिकैत ने सरकार और किसानों के बीच में मध्यस्ता करा कर इस बवाल को खत्म करने का एक बड़ा काम किया था, लेकिन अब राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए सभी दल के नेता लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri Voilence) जाने की पुरजोर कोशिश में लगे हुए हैं। लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri Voilence) जाने के दौरान सीतापुर में प्रियंका गांधी को गिरफ्तार किया जाता है तो लखनऊ में अखिलेश यादव को गिरफ्तार किया जाता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लखनऊ एयरपोर्ट पर रोक लिया जाता है तो कुछ नेताओं को मेरठ तथा अन्य जगहों पर रोक लिया जाता है।

Lakhimpur Kheri Voilence को लेकर राहुल गाँधी ने आज की थी एक प्रेस कांफ्रेंस

सवाल यह है कि जब सरकार किसानों की पूरी मांग को मान ली तो फिर यह राजनीतिक दल अपनी अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए लखीमपुर क्यों जाना चाहते हैं? इस पूरे मामले पर राहुल गांधी ने सुबह 10:30 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उसमें प्रियंका गांधी के साथ में हुए बुरे बर्ताव को लेकर सवाल किया तो उन्होंने जवाब दिया कि हमें मार दीजिए या हमारे साथ बुरा बर्ताव कीजिए उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मुद्दा अगर किसानों का है तो हम उनकी बात करते रहेंगे।

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राहुल गाँधी को संबित पात्रा ने दिया करारा जवाब

एक किसान के पोस्टमार्टम पर भी राहुल गांधी ने सवाल उठाया जिसका जवाब देते हुए संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी हर बार गैर जिम्मेदाराना रवैया दिखाते रहते हैं। संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी ना तो डॉक्टर हैं और न पोस्टमार्टम करते हैं इसलिए वे पोस्टमार्टम पर सवाल कतई ना उठाएं क्योंकि यह भ्रम फैलाने वाला काम है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने भी आज की एक प्रेस कांफ्रेंस

वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दोपहर 12:00 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कॉन्फ्रेंस में किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ाने (Lakhimpur Kheri Voilence) के बाद भी कोई गिरफ्तार नहीं हुआ। इस पर उन्होंने कहा कि पूरा सिस्टम हत्यारे का साथ दे रहा है ऐसा तो सिर्फ हमने हिंदी फिल्मों में ही देखा है।

केजरीवाल ने कहा कि देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है लेकिन नेताओं को पीड़ित परिवार से मिलने से रोक दिया जाता है ऐसा तो अंग्रेज किया करते थे। उन्होंने कहा कि मंत्री बोल रहे हैं कि गाड़ी में उनका बेटा नहीं था, एक हफ्ते बाद वे कहेंगे कि वहां गाड़ी नहीं थी और आगे कहीं ऐसा ना बोल दे कि कोई किसान ही वहां नहीं था।

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